अराफात की नमाज कैसे पढ़ी जाती है? - अराफात के दिन (हज के दौरान) मस्जिद-ए-नमराह में ज़ुहर और अस्र की नमाज़ एक साथ (कसर) पढ़ी जाती है।
अराफात के दिन (हज के दौरान) मस्जिद-ए-नमराह में ज़ुहर और अस्र की नमाज़ एक साथ (कसर) पढ़ी जाती है। इमाम के पीछे दोनों नमाज़ों को 4-4 रकात के बजाय 2-2 रकात करके अलग-अलग जमाअत से अदा किया जाता है, जिसके बाद अराफात के मैदान में ज़िक्र और दुआ की जाती है 。 अराफात के दिन या किसी भी सामान्य 2 रकात नमाज़ (जैसे नफिल या सुन्नत) को पढ़ने का सही तरीका निम्नलिखित है : 1. नियत (Niyat) दिल में इरादा करें कि आप किस नमाज़ (जैसे नफिल, सुन्नत या फर्ज़) की 2 रकात अदा कर रहे हैं। ज़ुबान से कहना ज़रूरी नहीं है, लेकिन आप दिल में यह सोच सकते हैं कि "मैं 2 रकात नमाज़ अल्लाह के लिए पढ़ रहा हूं।" 2. पहली रकात तक्बीरे तहरीमा: अपने दोनों हाथों को कानों तक उठाएं और "अल्लाहु अकबर" कहें। इसके बाद हाथों को नाभि के ऊपर बांध लें। सना: "सुब्हानकल्लाहुम्मा व बिहम्दिका व तबारकस्मुक व तआला जद्दुका व ला इलाहा गैरुक" पढ़ें। सूरह फातिहा: "बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम" के साथ सूरह फातिहा (अलहम्दुलिल्लाह...) पढ़ें और अंत में "आमीन" कहें。 सूरह: इसके बाद कुरान की कोई भी स...